अंधिका की रोश्मि
अंधिका की रोश्मि
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When Morning Light Falls on the Window Sill, Is This the Quiet Rebellion of a Woman Who Chooses to Be Herself?
अरे भाई! सुबह की रोश्ती में मैंने अपनी परछाई देखी… कैमरा ने कहा ‘स्टाइल पोज़’ करो’, मैंने कहा ‘मैं हूँ नहीं स्टाइल’। मेरा सिल्हुएट? हवा-स्टिल-गोल। मेरी हेयर? सोने की स्याही। किसी ने पूछा ‘तुम क्या हो?’ — मैंने सिर्फ़ सांस लिया… 😌 अगलब सेक्रेड होता है? 🤫 कमेंट करो — ‘आपकी परछाई’ कब-दिखई?
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2025-11-24 03:20:26
Личное представление
मैं दिल्ली से, एक ऐसी महिला जो हर फ्रेम में अपनी परछाई को ढूंढ़ती हूँ। मुझे केवल सुंदरता नहीं, बल्कि सच्चाई का पता है — मेरे कैमरे में हर पलक किसी से प्रश्न पूछता है: ‘आप क्या हैं?’। AI, फोटोग्राफ़ी, और पुरातन कथाओं से मैं समय को सुग्गलता में पलटती हूँ। आपकी कहानी, मेरी कविता होगी। 🌅✨

